श्रीवेदविद्यावर्धिनी फाउंडेशन, नागपूर

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गुरुकुलम्
श्रीवेदविद्यावर्धिनी

About Gurukulam

।।श्रीतारायै नमः ।।

शाङ्कर पीठों मे विराजमान सभी प्रतिष्ठित शंकराचार्यों को हम प्रणाम करतें हैं । ब्रह्मलीन परमादरणीय पूज्य शंकराचार्य स्वामीश्री स्वरुपानंद सरस्वती महाराजश्री के हम शिष्य हैं जिनकी ही प्रेरणा से सनातन संस्कृति का पुनरुद्धार हो इस कामना से वैदिक परम्परा का अनुसरण करतें हुए द्विजजातियों के लिए वेद और शास्त्र की शिक्षा प्रदान करने का निर्णय लिया गया हैं । यद्यपि भारत में बहुत ऐसे गुरुकुल हैं जहां पर वेद और शास्त्र की शिक्षा दी जा रहीं हैं लेकिन इस समय भारत की भयावह स्थिति को देखते हुए आध्यात्मिक के साथ भौतिक शिक्षा का भी संयोजन होना चाहिए इस विषय में विचार करके हमने परमपूजनीय श्रीविवेक पांढरीकर गुरु जी की कृपा से सर्वप्रथम गुरुकुल नागपुर में प्रारंभ किया । यद्यपि यह गुरुकुल २९ वर्षों से प्रतापनगर नागपुर में चल रहा था लेकिन किसी कारणवश वहां से वडधामना नारायण नगर पेंढरी में इस गुरुकुल का शुभारंभ किया गया लेकिन बहुत समय से यह गुरुकुल बंद था इसलिए हमें जैसे ही यह जानकारी लगी तभी मन में विचार आया कि हमें गुरु जी के सान्निध्य में रहकर वैदिक शिक्षा को आगे ले जाना चाहिए । क्योंकि हम भी इसी परंपरा से जुड़े हुए हैं इसलिए स्वाभाविक ही हैं इस तरह विचार आना । वर्तमान में हम गुरु जी के सान्निध्य में ही हैं और वेदकार्य संबंधित सहयोग कर रहें हैं । वैसे देखा जाए तो जो गुरु जी का संकल्प था की हमें वैदिक परंपरा का अनुसरण करतें हुए वेदकार्य में संलग्न रहना हैं ठीक वैसे ही विचार हमारे भी हैं हमने भी यह प्रण लिया था कि संपूर्ण भारत में २१ वैदिक गुरुकुलों का निर्माण करवाएंगे और वहां पर शास्त्रीय पद्धति के अनुसार वैदिक परम्परा का सरंक्षण करेंगे ।अब पूज्य गुरुदेव की कृपा से यह स्वप्न भी साकार होते हुए नजर आ रहा हैं बाल्यकाल से ही हमने वैदिक शिक्षा से प्रभावित होकर मन में दृढ़ निश्चय कर लिया था कि शिष्टाचार में रहते हुए विद्यार्थियों को शिष्ट पद्धति का अनुसरण करवाके वेद और शास्त्र की शिक्षा प्रदान करेंगे जिसमें प्रारंभिक शिक्षा का शुभारंभ करने के लिए हम तैयार हैं ।

भगवती तारा की असीम कृपा से प्रथम गुरुकुल प्रारम्भ हुआ हैं जिसका नाम वेदविद्यावर्धिनीगुरुकुलम् हैं यहां पर प्रारंभिक वैदिक शिक्षा बटुकों को दी जाएगी । और नित्य संध्यावंदनादि कर्म में प्रधानता दी जाएगी । और ओमप्रकाश शर्मा जी के निर्देशानुसार भौतिक शिक्षा का भी संयोजन किया जाएगा । आप सभी से यह निवेदन हैं कि आप इस परम्परा से जुड़े और अपने जीवन को धन्य बनाए ।

नमस्कार